स्कूलों की मनमानी पर सख्ती: अभिभावकों को बड़ी राहत
सहारनपुर / उत्तर प्रदेश:
स्कूलों द्वारा फीस, ड्रेस और किताबों के नाम पर हो रही मनमानी के खिलाफ प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। अब निजी स्कूलों को स्पष्ट नियमों के दायरे में रहकर ही काम करना होगा। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने पर भारी जुर्माना और मान्यता रद्द तक की कार्रवाई हो सकती है।
नए नियम क्या कहते हैं?
1. यूनिफॉर्म नहीं बदलेगी – 5 साल तक वही ड्रेस
अब स्कूल 5 साल से पहले यूनिफॉर्म नहीं बदल सकेंगे।
इससे अभिभावकों को हर साल नई ड्रेस पर हजारों रुपये खर्च करने से राहत मिलेगी।
छोटे भाई-बहन भी पुरानी ड्रेस का उपयोग कर सकेंगे।
2. किताबें किसी भी दुकान से खरीदने की आज़ादी
स्कूल किसी एक दुकान से किताबें या कॉपी खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकते।
अभिभावक अब खुले बाजार से सस्ती किताबें खरीद सकते हैं।
इससे स्कूल-बुक सेलर कमीशन का खेल खत्म होने की उम्मीद है।
3. फीस का पूरा हिसाब देना अनिवार्य
हर फीस की पक्की रसीद देना जरूरी।
स्कूल को वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर पूरी फीस का विवरण दिखाना होगा।
कैपिटेशन फीस / डोनेशन पूरी तरह प्रतिबंधित।
सालाना फीस वृद्धि 5% से अधिक नहीं हो सकेगी।
4. नियम तोड़े तो सख्त कार्रवाई
नियम उल्लंघन पर 5 लाख रुपये तक जुर्माना।
बार-बार शिकायत मिलने पर स्कूल की मान्यता रद्द हो सकती है।
जरूरत पड़ने पर NOC भी समाप्त की जा सकती है।
अभिभावक शिकायत कहाँ करें?
अगर कोई स्कूल दबाव बनाता है या नियम तोड़ता है तो अभिभावक इन तरीकों से शिकायत कर सकते हैं:
जिला प्रशासन / DM कार्यालय में लिखित शिकायत
संबंधित नोडल अधिकारी या शिक्षा विभाग से संपर्क
CM हेल्पलाइन 1076 पर शिकायत दर्ज
कानूनी आधार
यह आदेश उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम के तहत लागू किया गया है, जिसका उद्देश्य निजी स्कूलों में फीस और शैक्षणिक सामग्री की मनमानी पर नियंत्रण करना है।
निचोड़
अब निजी स्कूलों के लिए साफ संदेश है —
ड्रेस 5 साल तक वही, किताबें कहीं से भी खरीदो, फीस का पूरा हिसाब दो।
यदि कोई स्कूल दबाव बनाता है तो अभिभावक सीधे प्रशासन से शिकायत कर सकते हैं, जहां सख्त कार्रवाई का प्रावधान है।
