अवैध निर्माण पर बुलडोज़र नहीं, पहले जवाबदेही चाहिए: विकास प्राधिकरणों की विफलता पर कठोर कानून बने

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अवैध निर्माण पर बुलडोज़र नहीं, पहले जवाबदेही चाहिए: विकास प्राधिकरणों की विफलता पर कठोर कानून बने।

देश के अनेक शहरों में एक खतरनाक प्रशासनिक संस्कृति विकसित हो चुकी है। अवैध निर्माण वर्षों तक खुलेआम होते हैं, विकास प्राधिकरणों के अधिकारी सब कुछ देखते हैं, शिकायतें मिलती हैं, नक्शों के उल्लंघन स्पष्ट दिखाई देते हैं—फिर भी कार्रवाई नहीं होती। लेकिन जैसे ही भवन तैयार हो जाता है, करोड़ों रुपये खर्च हो जाते हैं, खरीदार फँस जाते हैं और राजनीतिक या न्यायिक दबाव बनता है, तब अचानक सीलिंग और बुलडोज़र अभियान शुरू हो जाता है।

यह व्यवस्था कानून का शासन कम और प्रशासनिक विफलता का सार्वजनिक प्रदर्शन अधिक प्रतीत होती है।

सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि कोई निर्माण अवैध था, तो उसकी पहली ईंट रखते समय कार्रवाई क्यों नहीं हुई? निर्माण पूरा होने तक प्रशासन क्या कर रहा था? क्या संबंधित अधिकारियों की कोई जवाबदेही नहीं होनी चाहिए?

दुर्भाग्यपूर्ण सत्य यह है कि हमारे देश के कई विकास प्राधिकरणों में रोकथाम की संस्कृति कमजोर और “देर से कार्रवाई” की संस्कृति मजबूत दिखाई देती है। प्रारंभिक चरण में एक अवैध निर्माण को रोकने में जहां सीमित प्रशासनिक संसाधन लगते, वहीं वर्षों बाद ध्वस्तीकरण अभियान में भारी पुलिस बल, मशीनरी, सरकारी खर्च, न्यायालयी विवाद और सामाजिक तनाव पैदा होता है। इसका भुगतान अंततः जनता के करों से होता है।

यह केवल निर्माण नियमों का प्रश्न नहीं; यह सार्वजनिक धन की बर्बादी, प्रशासनिक उत्तरदायित्व और सुशासन का विषय है।

इसीलिए अब समय आ गया है कि देश के प्रत्येक राज्य में विकास प्राधिकरणों और नगर नियोजन संस्थाओं की प्रशासनिक असफलताओं को नियंत्रित करने हेतु एक कठोर एवं समर्पित कानून बनाया जाए।

ऐसे कानून में निम्नलिखित सशक्त प्रावधान अनिवार्य होने चाहिए:

पहला — “रोकथाम पहले” सिद्धांत।

किसी भी संदिग्ध या अवैध निर्माण की सूचना मिलने के बाद निर्धारित समय सीमा में निरीक्षण, नोटिस और आवश्यक होने पर तत्काल सीलिंग की बाध्यता हो। अधिकारियों को निष्क्रिय रहने की छूट समाप्त हो।

दूसरा — अधिकारी उत्तरदायित्व कानून।

यदि अवैध निर्माण प्रशासन की जानकारी के बावजूद विकसित होकर पूर्ण हो जाता है, तो संबंधित क्षेत्रीय अभियंता, प्रवर्तन अधिकारी तथा जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों की व्यक्तिगत एवं विभागीय जिम्मेदारी तय की जाए।

तीसरा — सार्वजनिक धन हानि प्रावधान।

देर से की गई कार्रवाई के कारण हुए ध्वस्तीकरण व्यय, अतिरिक्त प्रशासनिक लागत और सरका

संसाधनों की बर्बादी का स्वतंत्र मूल्यांकन हो तथा गंभीर लापरवाही के मामलों में उत्तरदायित्व निर्धारित किया जाए।

चौथा — पारदर्शी डिजिटल निगरानी प्रणाली।

प्रत्येक शिकायत, निरीक्षण, नोटिस और कार्रवाई का डिजिटल रिकॉर्ड सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध हो ताकि जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।

पाँचवाँ — स्वतंत्र ऑडिट एवं नागरिक निरीक्षण।

विकास प्राधिकरणों के प्रवर्तन तंत्र का वार्षिक स्वतंत्र ऑडिट हो, जिससे पता चले कि कितने अवैध निर्माण समय रहते रोके गए और कितने प्रशासनिक शिथिलता से विकसित हुए।

लोकतांत्रिक प्रशासन में अधिकारों के साथ उत्तरदायित्व भी आवश्यक है। यदि किसी नागरिक द्वारा कानून का उल्लंघन दंडनीय है, तो समय रहते कानून लागू न करने वाली प्रशासनिक निष्क्रियता भी परीक्षण और जवाबदेही से बाहर नहीं हो सकती।

शहरों का नियोजित विकास केवल नक्शों, मास्टर प्लान और अधिसूचनाओं से संभव नहीं होता; उसके लिए ईमानदार प्रवर्तन और उत्तरदायी प्रशासन चाहिए।

बुलडोज़र चलाना आसान है; कठिन कार्य है—अवैधता को जन्म लेने से रोकना।

देश को अब केवल अवैध निर्माण विरोधी कानून नहीं, बल्कि “प्रशासनिक विफलता जवाबदेही कानून” की आवश्यकता है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि जनता का पैसा, शहरों की योजना और कानून की गरिमा—तीनों प्रशासनिक उदासीनता की भेंट न चढ़ें।

शिखर

अधिवक्ता उच्च न्यायालय लखनऊ पीठ।