राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम की धारा 16 में सुधार क्यों आवश्यक है?
शिखर, अधिवक्ता।
राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 की धारा 16 सद्भावनापूर्वक की गई कार्रवाई के लिए अधिकारियों को कानूनी संरक्षण प्रदान करती है। यह संरक्षण आवश्यक है, ताकि अधिकारी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में कानून के अनुसार कार्य करने से भयभीत न हों। लेकिन इस संरक्षण की आड़ में मनमानी, दुर्भावनापूर्ण या गंभीर लापरवाहीपूर्ण कार्रवाई को संरक्षण नहीं मिलना चाहिए।संविधान के अनुच्छेद 21 और 22 व्यक्ति की स्वतंत्रता और उससे संबंधित संवैधानिक सुरक्षा की रक्षा करते हैं। निवारक निरोध एक असाधारण शक्ति है। इसलिए इसका प्रयोग केवल वास्तविक और आवश्यक परिस्थितियों में, उचित सामग्री तथा निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
इसलिए धारा 16 में स्पष्ट किया जाना चाहिए कि सद्भावना का कानूनी संरक्षण ऐसी कार्रवाई पर लागू नहीं होगा, जो दुर्भावना या अनुचित उद्देश्य से की गई हो;महत्वपूर्ण तथ्यों को जानबूझकर छिपाकर की गई हो,कानून या संवैधानिक सुरक्षा उपायों का जानबूझकर उल्लंघन करती हो,गंभीर लापरवाही या उचित विचार-विवेक के अभाव का परिणाम हो,व्यक्तिगत, राजनीतिक या किसी अन्य अनुचित उद्देश्य से शक्ति के प्रयोग पर आधारित हो।
इसका मूल सिद्धांत होना चाहिए-“सद्भावना का संरक्षण वैधानिक शक्ति के ईमानदार प्रयोग को मिले, शक्ति के मनमाने प्रयोग को नहीं।”इस प्रकार, धारा 16 में सुधार का उद्देश्य अधिकारियों को कमजोर करना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिक स्वतंत्रता के बीच संवैधानिक संतुलन तथा सरकारी शक्ति की जवाबदेही सुनिश्चित करना होना चाहिए।
