बलरामपुर- जनपद का “विजन 2030” तैयार, प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने में जनपद का होगा विशेष योगदान

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बलरामपुर- जनपद का “विजन 2030” तैयार, प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने में जनपद का होगा विशेष योगदान

कृषि, उद्योग, पर्यटन और सीमा व्यापार से बदलेगी बलरामपुर की तस्वीर

वर्ष 2030 तक जनपद की जीडीपी ₹40 हजार करोड़ से अधिक पहुंचाने का लक्ष्य

वैल्यू एडिशन हब के रूप में विकसित होगा बलरामपुर, रोजगार के नए अवसर होंगे सृजित

उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के माननीय मुख्यमंत्री जी के संकल्प को साकार करने की दिशा में जनपद बलरामपुर की विशेष भूमिक रहेगी , जिसके तहत डीएम श्री विपिन कुमार जैन द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए “आकांक्षा से एक्शन: री इमेजिनिंग बलरामपुर – रणनीतिक रोडमैप 2030” (Vision 2030) का खाका तैयार किया है। इस संबंध में कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी विपिन कुमार जैन की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें जनपद की अर्थव्यवस्था को नई गति देने और राज्य की विकास दर में अधिक योगदान सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि आकांक्षी जिला कार्यक्रम में देश में प्रथम स्थान प्राप्त करने के बाद अब बलरामपुर विकास की नई ऊंचाइयों को छूने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि जिले की भौगोलिक स्थिति, कृषि क्षमता, नेपाल सीमा से जुड़ाव, पर्यटन संभावनाएं तथा मानव संसाधन बलरामपुर को एक बड़े आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित करने की क्षमता रखते हैं।

बैठक में वर्ष 2030 तक जनपद की वर्तमान जीडीपी (GDDP) जो नवंबर 2024 में ₹16,108 करोड़ थी, इसको बढ़ाकर लगभग ₹40,605 करोड़ करने का लक्ष्य रखा गया। साथ ही प्रति व्यक्ति आय जो नवंबर 2024 में ₹52,751 थी , इसकोबढ़ाकर ₹1,26,737 तक पहुंचाने की कार्ययोजना प्रस्तुत की गई। राज्य की कुल जीडीपी में बलरामपुर की हिस्सेदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।

बैठक में बताया गया कि बलरामपुर को केवल कृषि उत्पादन तक सीमित न रखते हुए “वैल्यू एडिशन हब” के रूप में विकसित किया जाएगा। जिले में गन्ना एवं धान के बड़े उत्पादन को देखते हुए एग्रो-प्रोसेसिंग इकाइयों की स्थापना, खाद्य प्रसंस्करण, कोल्ड चेन तथा वेयरहाउसिंग सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। गन्ना आधारित बायो-प्लास्टिक एवं एथिनॉल उत्पादन को बढ़ावा देकर हरित औद्योगिक विकास की दिशा में कार्य किया जाएगा।

इसके अतिरिक्त बायपास क्षेत्र के आसपास इंडस्ट्रियल हब एवं MSME क्लस्टर विकसित करने की योजना प्रस्तुत की गई, जिससे स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे। नेपाल सीमा से लगे क्षेत्र का लाभ उठाते हुए सीमा व्यापार को व्यवस्थित कर बलरामपुर को क्षेत्रीय लॉजिस्टिक्स हब के रूप में विकसित करने की रणनीति पर भी चर्चा की गई।

पर्यटन क्षेत्र को जनपद की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बनाने के उद्देश्य से मा पाटेश्वरी देवीपाटन मंदिर, सुहेलदेव वन्यजीव अभ्यारण्य तथा थारू जनजातीय सांस्कृतिक विरासत को जोड़ते हुए एक व्यापक पर्यटन सर्किट विकसित करने की योजना प्रस्तुत की गई। इससे पर्यटन एवं सेवा क्षेत्र में हजारों नए रोजगार सृजित होने की संभावना व्यक्त की गई।

बैठक में उत्तर प्रदेश राज्य परिवर्तन आयोग (STC) से लंबित औद्योगिक परियोजनाओं की शीघ्र स्वीकृति, बायो-प्लास्टिक पायलट प्रोजेक्ट, कोल्ड चेन एवं वेयरहाउसिंग हेतु सब्सिडी, सीमा व्यापार को प्रोत्साहन तथा जिला स्तर पर प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (PMU) की स्थापना के लिए विशेष सहयोग की अपेक्षा भी व्यक्त की गई।

जिलाधिकारी ने कहा कि स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, सिंचाई एवं ग्रामीण सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं को और मजबूत करते हुए बलरामपुर को उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था का एक अग्रणी एवं आदर्श जनपद बनाया जाएगा।

इस दौरान मुख्य विकास अधिकारी श्री हिमांशु गुप्ता,मुख्य चिकित्सा अधिकारी व अन्य संबंधित अधिकारी/कर्मचारीगण उपस्थित रहें।