UP *ईंधन के दामों को सरकार कैसे काबू करे?- शिखर एडवोकेट
देश में पेट्रोल-डीज़ल की बढ़ती कीमतें आम जनता के लिए बड़ी चिंता बन चुकी हैं। इसका असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि महंगाई, खेती, व्यापार और घर के बजट तक पहुँचता है। इसलिए सरकार को ईंधन कीमतों पर गंभीरता से काम करने की ज़रूरत है।
सबसे पहले सरकार को टैक्स नीति पर पुनर्विचार करना चाहिए। पेट्रोल-डीज़ल के दामों में टैक्स का बड़ा हिस्सा होता है। हालात के अनुसार करों में संतुलन लाकर जनता को राहत दी जा सकती है।
दूसरा कदम पेट्रोल-डीज़ल को जीएसटी के दायरे में लाने पर विचार हो सकता है। इससे कर व्यवस्था अधिक सरल और पारदर्शी बन सकती है, हालांकि इसके लिए केंद्र और राज्यों के बीच सहमति ज़रूरी होगी।
सरकार को तेल आयात पर निर्भरता कम करने पर भी ध्यान देना होगा। सौर ऊर्जा, जैव ईंधन, इलेक्ट्रिक वाहन और अन्य वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देकर भविष्य में दबाव कम किया जा सकता है।
इसके साथ-साथ सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना और रणनीतिक तेल भंडारण बढ़ाना भी महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं, ताकि ईंधन की खपत और वैश्विक कीमतों के असर को कम किया जा सके।
अंत में, पारदर्शिता भी जरूरी है। जनता को पता होना चाहिए कि पेट्रोल-डीज़ल की कीमत में तेल, परिवहन और टैक्स का कितना हिस्सा है।
ईंधन के दाम नियंत्रित करना आसान नहीं, लेकिन समझदारी भरी नीतियों और दूरदर्शी योजना से सरकार जनता को राहत देने की दिशा में प्रभावी कदम उठा सकती है।
शिखर
अधिवक्ता उच्च न्यायालय लखनऊ पीठ।
