पासपोर्ट प्रक्रिया से परेशान अधिवक्ता शिखर, व्यवस्था की जवाबदेही पर उठाए सवाल

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पासपोर्ट प्रक्रिया से परेशान अधिवक्ता शिखर, व्यवस्था की जवाबदेही पर उठाए सवाल।

लखनऊ। पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया में लगातार हो रही परेशानी को लेकर अधिवक्ता शिखर ने पासपोर्ट सेवा व्यवस्था की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं।

शिखर के अनुसार उन्होंने मार्च 2026 में पासपोर्ट आवेदन का शुल्क ऑनलाइन जमा किया था। पर्याप्त दस्तावेज उपलब्ध न होने के कारण उन्हें पासपोर्ट कार्यालय से दो बार वापस किया गया। बाद में जब सभी आवश्यक दस्तावेज पूरे हो गए, तब 1 जुलाई 2026 से शुल्क संबंधी नियमों में बदलाव हो गया।

शिखर का कहना है कि उन्होंने स्पष्ट रूप से यह जानना चाहा कि पहले से जमा शुल्क पर नया शुल्क लागू होगा या नहीं, लेकिन प्रत्येक बार ग्राहक सेवा अधिकारी से अलग-अलग जानकारी मिली। इसी दौरान पुनर्निर्धारित मुलाकात का विकल्प ऑनलाइन आवेदन-पटल पर दिखाई नहीं दिया।

उन्होंने क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय से भी संपर्क किया। बातचीत के बाद उन्हें फोन के माध्यम से संपर्क करने को कहा गया, लेकिन बाद में लगातार संपर्क स्थापित नहीं हो सका। ई-मेल के माध्यम से शिकायत करने पर कार्यालय की ओर से जवाब दिया गया कि शिकायत को आवश्यक कार्रवाई के लिए शिकायत प्रकोष्ठ को भेज दिया गया है। इसके बावजूद उनकी समस्या का कोई प्रभावी समाधान नहीं हुआ।

अधिवक्ता शिखर ने सवाल उठाया कि यदि नागरिक समय पर शुल्क जमा करता है और आवेदन प्रक्रिया पूरी करने के लिए तैयार है, तो उसे स्पष्ट और एक समान जानकारी क्यों नहीं दी जाती?

उन्होंने कहा, “क्या पासपोर्ट व्यवस्था नागरिक की सुविधा के लिए है या उसे बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगवाने के लिए? यदि शिकायत के बाद भी समस्या का समाधान नहीं होता, तो क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय की जवाबदेही क्या है?”

शिखर ने मांग की कि पासपोर्ट सेवा में स्पष्ट सूचना, ऑनलाइन व्यवस्था की विश्वसनीयता, अधिकारियों की जवाबदेही और शिकायतों के समयबद्ध समाधान की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। विधायिका को पासपोर्ट अधिनियम में बदलाव करके अधिकारियों की जवाबदेही तय करनी चाहिए। जिन अधिकारियों की वजह से आवेदक को परेशानी हो उनपर जुर्माना लगाया जाना चाहिए।