पंडित रामप्रसाद बिस्मिल को आदर्श मानें वर्तमान भारत के युवा।
राम प्रसाद बिस्मिल केवल एक क्रांतिकारी नहीं थे, बल्कि राष्ट्रभक्ति, त्याग, साहस और चरित्रबल के ऐसे प्रतीक थे जिनका जीवन आज के भारत के युवाओं के लिए प्रेरणा का अमूल्य स्रोत है। जिस आयु में आज अनेक युवा मनोरंजन और भौतिक सुखों में खो जाते हैं, उस आयु में बिस्मिल जी ने अपना जीवन राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए समर्पित कर दिया था।
बिस्मिल जी का मानना था कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसके जागरूक और चरित्रवान युवाओं में निहित होती है। उन्होंने अपने जीवन से यह सिद्ध किया कि दृढ़ संकल्प, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम के बल पर असंभव प्रतीत होने वाले लक्ष्य भी प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं, परिवार और यहां तक कि अपने प्राणों का भी बलिदान राष्ट्रहित में कर दिया।
आज भारत विश्व की सबसे युवा आबादी वाले देशों में से एक है। ऐसे समय में युवाओं के सामने अनेक चुनौतियाँ हैं—बेरोज़गारी, नशे की प्रवृत्ति, सामाजिक विभाजन, डिजिटल व्यसन और नैतिक मूल्यों का क्षरण। इन चुनौतियों से निपटने के लिए युवाओं को बिस्मिल जी के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। उनका जीवन सिखाता है कि सफलता केवल व्यक्तिगत उन्नति में नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के उत्थान में भी निहित है।
बिस्मिल जी एक उत्कृष्ट कवि और लेखक भी थे। उनकी रचनाओं में राष्ट्रप्रेम, आत्मसम्मान और संघर्ष की भावना स्पष्ट दिखाई देती है। उनकी प्रसिद्ध पंक्तियाँ आज भी युवाओं के हृदय में देशभक्ति की ज्वाला प्रज्वलित करती हैं। उन्होंने युवाओं को अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध खड़े होने का संदेश दिया तथा सत्य और स्वाभिमान के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
आज आवश्यकता इस बात की है कि भारत का युवा बिस्मिल जी के आदर्शों—राष्ट्रप्रेम, ईमानदारी, परिश्रम, आत्मानुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व—को अपने जीवन में उतारे। यदि युवा पीढ़ी उनके विचारों को अपनाए, तो भारत न केवल आर्थिक और तकनीकी रूप से बल्कि नैतिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी विश्व का अग्रणी राष्ट्र बन सकता है।
पंडित रामप्रसाद बिस्मिल का जीवन हमें यह संदेश देता है कि महान राष्ट्र उन्हीं युवाओं के बल पर निर्मित होते हैं जो अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर समाज और देश के लिए जीने का साहस रखते हैं। वर्तमान भारत के युवाओं को बिस्मिल जी को केवल इतिहास की पुस्तक का पात्र नहीं, बल्कि अपने जीवन का आदर्श बनाना चाहिए।
“सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है,
देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-क़ातिल में है।”
यही भावना आज भी भारत के युवाओं को राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करती है।
शिखर
अधिवक्ता उच्च न्यायालय लखनऊ पीठ।
