धारा 34 के संबंध में अधिवक्तागण से सार्थक एवं सकारात्मक वार्ता के लिए जिला प्रशासन सदैव तत्पर — जिलाधिकारी
जिलाधिकारी ने कहा,किसी भी प्रकरण का समाधान आपसी संवाद, समन्वय से ही संभव
जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन ने बताया कि आज दिनांक 21 अक्टूबर 2026 को धारा 34 से संबंधित प्रकरण को लेकर अधिवक्तागण कलेक्ट्रेट पहुंचे। अधिवक्तागण के कलेक्ट्रेट आगमन की जानकारी प्राप्त होते ही जिलाधिकारी वार्ता करने ,पक्ष सुनने तथा प्रकरण के संबंध में संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से अपने कक्ष से बाहर आए। किंतु अधिवक्तागण द्वारा अपना पक्ष प्रस्तुत किए बिना एवं किसी प्रकार की वार्ता किए बिना वापस चले गए।
जिलाधिकारी ने कहा कि जब जिला प्रशासन स्वयं अधिवक्तागण की बात सुनने एवं संबंधित प्रकरण पर सकारात्मक वार्ता करने के लिए तत्पर था, ऐसे में बिना संवाद स्थापित किए वापस चले जाना उचित नहीं है। प्रशासन की ओर से वार्ता के लिए तत्परता प्रदर्शित किए जाने के बावजूद संवाद का अवसर प्राप्त न हो पाना खेदजनक है। किसी भी विधिक अथवा प्रशासनिक प्रकरण में संबंधित पक्षों के मध्य सार्थक संवाद स्थापित होना आवश्यक है, जिससे प्रकरण से जुड़े तथ्यों, समस्याओं एवं अपेक्षाओं को समुचित रूप से समझते हुए नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही की जा सके।
उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन की मंशा सदैव अधिवक्तागण के साथ सौहार्दपूर्ण वातावरण में संवाद स्थापित करने तथा उनके द्वारा उठाए गए विषयों का विधिसम्मत समाधान सुनिश्चित करने की रही है। इसी उद्देश्य से अधिवक्तागण के आगमन की जानकारी मिलते ही वार्ता को आए थे, ताकि प्रकरण के संबंध में आवश्यक विचार-विमर्श किया जा सके। किंतु अधिवक्तागण द्वारा बिना वार्ता किए वापस चले जाने के कारण उक्त अवसर पर प्रकरण के संबंध में कोई सार्थक चर्चा नहीं हो सकी।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि किसी भी समस्या अथवा प्रकरण के समाधान के लिए संवाद की प्रक्रिया अत्यंत महत्वपूर्ण है। बिना वार्ता किए वापस लौटने से संबंधित विषय पर विचार-विमर्श एवं समाधान की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाती है। अतः आवश्यक है कि संबंधित पक्ष आपसी समन्वय एवं सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ संवाद की प्रक्रिया में सहभागी बनें, जिससे प्रकरण का नियमानुसार एवं उचित समाधान सुनिश्चित किया जा सके।
जिलाधिकारी ने दिनांक 17 अक्टूबर 2026 की घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि उक्त तिथि को अधिवक्तागण द्वारा धारा 34 से संबंधित प्रकरण को लेकर कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन किया गया था, जबकि उस दिन वह पूर्व निर्धारित शासकीय कार्यक्रम के अंतर्गत तहसील तुलसीपुर में आयोजित सम्पूर्ण समाधान दिवस में उपस्थित रहकर जनसामान्य की शिकायतों एवं समस्याओं की सुनवाई कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सम्पूर्ण समाधान दिवस शासन की प्राथमिकताओं में सम्मिलित महत्वपूर्ण कार्यक्रम है, जिसमें आमजन की शिकायतों का निस्तारण सुनिश्चित किया जाता है। ऐसे में जिलाधिकारी की पूर्व निर्धारित शासकीय कार्य एवं कलेक्ट्रेट में अनुपस्थिति के दौरान प्रदर्शन किया जाना तथा आज वार्ता के लिए उपलब्ध होने के बावजूद अधिवक्तागण का बिना संवाद किए वापस लौट जाना, सकारात्मक एवं सार्थक संवाद के प्रति अपेक्षित गंभीरता एवं अभाव को परिलक्षित करता है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकरण के समाधान के लिए केवल विरोध अथवा प्रदर्शन के स्थान पर आपसी संवाद एवं समन्वय की प्रक्रिया को प्राथमिकता दिया जाना आवश्यक है। जिला प्रशासन अधिवक्तागण के साथ सम्मानजनक वातावरण में वार्ता कर प्रकरण के नियमानुसार समाधान के लिए सदैव तत्पर है।
जिलाधिकारी ने पूर्व में हुई घटना के संबंध में भी स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि इससे पूर्व धारा 34 के संबंध में ज्ञापन देने हेतु अधिवक्तागण के कलेक्ट्रेट आगमन की कोई पूर्व सूचना उन्हें प्राप्त नहीं हुई थी। उस समय वह समेकित दिव्यांग विद्यालय में आयोजित दिव्यांग बच्चों के पूर्व निर्धारित कार्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए कलेक्ट्रेट से प्रस्थान कर चुके थे। उक्त कार्यक्रम में दिव्यांग बच्चे पूर्वाह्न 12 बजे से उनकी प्रतीक्षा कर रहे थे। बच्चों के प्रति संवेदनशीलता एवं पूर्व निर्धारित कार्यक्रम की प्रतिबद्धता के दृष्टिगत कार्यक्रम में उपस्थित होना आवश्यक था।
जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन ने कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य सभी संबंधित पक्षों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए विधिक एवं प्रशासनिक विषयों का नियमानुसार समाधान सुनिश्चित करना है। अधिवक्तागण द्वारा उठाए गए धारा 34 से संबंधित प्रकरण पर भी प्रशासन सकारात्मक एवं सार्थक वार्ता के लिए पूरी तरह तैयार है।
जिलाधिकारी ने पुनः स्पष्ट किया कि धारा 34 से संबंधित प्रकरण में अधिवक्तागण से संवाद के लिए जिला प्रशासन के स्तर पर कोई अवरोध नहीं है। अधिवक्तागण जब भी वार्ता के लिए आएंगे, उनका पक्ष गंभीरतापूर्वक सुना जाएगा तथा प्रस्तुत तथ्यों एवं विधिक प्रावधानों के अनुरूप नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।
उन्होंने अधिवक्तागण से अपील की कि प्रकरण के संबंध में आपसी संवाद एवं समन्वय का मार्ग अपनाएं, जिससे सौहार्दपूर्ण वातावरण में सार्थक विचार-विमर्श के माध्यम से नियमानुसार समाधान की दिशा में आगे बढ़ा जा सके।
